अणघड़िया अमूरत भाठा

खावै है ठोकरां

रूप दौ।

मरूधरा रा जूनां रूंख

बळग्या कै सूखग्या

अबै तो बेगा

नुवा बीज बौ!

भणता जूंनी पोथ्यां

सै आखर होयग्या कंठै

मन भरीजग्यो

सोच समझ नै नुंवा-नुंवा

कीं आखर दो।

स्रोत
  • पोथी : ओळमों ,
  • सिरजक : पारस अरोड़ा ,
  • प्रकाशक : कल्पना लोक प्रकाशन रतनगढ़ (राज.) ,
  • संस्करण : जुलाई
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