जद आजादी आंसू झारै, रो रो मरै, करै अपघात

मोटो देश, सैंकड़ी भासा, चाल, ढाल अर धर्म अनेक

जात, पांत, मजहब, फिरकां में, न्यारा भेळा हां सब अेक

गणतन्तर शासन जनता रो, इज जुगरो है वरदान

पराधीनता रा बै दुखड़ा, चित आवै जद कांपै प्राण

पण समझण वाळा नर थोड़ा, हीणां मांडी झांपा पात

आजादी नै बापू लाया, बां पर चढ़ग्या मोटा धोर

बजै पोल में ढोल सदा ही, सज्जन कद, समझ्योड़ा चोर

जेबां भरै करै मनमानी, टीप टाप में पूरा शाह,

भारत मां रो फाड़ काळजो, मिरचां भरै, लगावै दाह

खद्दर री चद्दर रै साथै, गांधी बिकै दलालां हाथ

सकळ बराबर कुण कम वैसी, भेदभाव रो किसो सवाल?

भारत रा सब भाग बराबर, क्यूं काढ़ो कीड़ी री खाल!

घटै बदै कद तांवण तांण्यां, तूट जाय आपसरो मेळ,

कींकर प्रान्त बदै सिर फोड़्यां, मारधाड़ सूं खूटै खेल,

माथा कुळै, सुणै कुण किणरी, करै कुलखाणा दिन में रात

जद आजादी आंसू झारै, रो रो मरै करै अपघात।

स्रोत
  • पोथी : जलम भोम ,
  • सिरजक : कान्ह महर्षि ,
  • संपादक : मूळचंद 'प्राणेश' ,
  • प्रकाशक : राजस्थानी भाषा प्रचार प्रकाशन, बीकानेर (राज.) ,
  • संस्करण : 2-3, जून-दिसम्बर
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