चांप ले जमीन बेटा, चिण ले मकान,
खूणै मांय रोड़ माथै, खोल ले दुकान,
कुण तनै रोकै लाडी, कुण तनै पालै रे,
राज लोकतंत्र को है, पूरी पोल चालै रे,
चौड़ै-धाड़ै खेल, पड़्यो चौड़ो चकान।
‘कम्पलेंट’ होज्या बी तो, आवै कोनी जांच रे,
जांच बी जे आ ज्यावै तो, चालै साल पांच रे,
इतणै में चुणाव आ ज्या, फेर कांई आंच रे,
बोट सूं बड़ो नीं कोई, ‘फायरप्रुफ’ कांच रे,
ओट ले तूं ईं कीं और, सोज्या खूंटी ताण।
दुनिया जे पीठ पीछै, गाळी तनै देवै रे,
आपरी भड़ास काढै, तेरो कांई लेवै रे,
चुपचाप सुण ले, तूं कुछ मती कैवै रे,
थोड़ी-बोळी बातां तो यूं ई चालती रैवै रे,
दम कांई राखै पण, दबी जुबान।
अफसर कोई आज्या तो आ बात कोनी मोटी रे,
तुड़वा दे मकान तेरो, बीं की कांई पोटी रे,
कुत्तै की औकात कित्ती, खाली अेक रोटी रे,
और जे तू नांख देगो बीं कै आगै बोटी रै,
कर ज्यागो तेरै दुश्मन को चालान।
कदै भी जे केस कोर्ट मांय चल्यो जावै रे,
न्याय में भरोसो राख, मती घबरावै रे,
साठ साल पैली फैसलो ई कोनी आवै रे,
हो सकै है जद ताणी तूं ई कोनी पावै रे,
स्यान सेती पहुंच जावै स्यात श्मशाण।