हुई सामली छींक, गळी में मिनकी मिलगी;
गधो जीवणो जाय, उघाड़ी छोरी मिलगी।
खोटा सुगन विचार कर, आंख्यां मींची खूब;
फिर भी फूट्यो पाछलो, साइकिल को ट्यूब॥
बापड़ो के करै?
पप्पू टुनटुन टप्प, गुड्डी अर पप्पी साथै;
मम्मी टिन्नी गैल, डैडी कै पिंटू माथै।
साइकिल सरकस बणी, फिसळी कादै बीच;
समठूणी ज्यूं बिखर रैया, टींगर सड़कां बीच॥
गिण्या तो घट गया?
धोळो पहर्यो कोट, पैंट भी धोळी पहरी;
धोळा पहर्या बूंट, मोजां री धोळी जोड़ी।
बण-ठण कर चाल्या इस्या, घूमण बीच बजार;
कादो उछळ्यो ट्रक्क स्यूं, गाबा हुया तैयार॥
मूंडै पर मांडणां?
बस में काठी भीड़, कसामस करतां चढ़िया;
खड़ा’ज अेको-अेक, अेक स्यूं काठा सटिया।
मोटी ताजी बहनजी, फंसगी बीचों बीच;
अेक उपकारी बापड़ो, छेड़ै ल्यायो खींच॥
बहिनजी चेप दी?
आ आई तारीख, अेक पर तनखा मिलगी;
सूता छत पर जाय, रात भी आधी ढळगी।
दिन ऊग्यो तनखा नहीं, आछी हुई चोट;
टुकड़ा-टुकड़ा उड रैया, फाट्या-फट्या नोट॥
बैठ्यो हो बांदरो?
आज अणूंती भीड़, कुली तो पैली कहदी;
खड़ा’ज बींटा माथ, गाडली सीटी दे दी।
पंखै स्यूं टकराविया, म्हांको भिड़ियो मूंड;
कुली बापड़ै काढ़ियो, सीट नीचै स्यूं ढूंढ़॥
कट्योड़ो कानड़ो?
धरम करै दातार, चीलां नै पूवा चिबावै;
कई सड़कां कै बीच, केळा खा छूंत खिंडावै।
नाळी में जातो पड़्यो, गेलै बहतो मोड;
खूणी गोडा फूटिया, अर भांगीज्यो भोड॥
मूंडै में गुलगुलो?
आया सेठजी देस, जोसीजी जीमण आया;
भांत-भांत मिष्ठान्न, परोस्या थाळ सजाया।
जोसीजी जीमण लग्या, कुत्ता लड़िया दोय;
दुरै-दुरै पंडत करै, थाळी ऊंदी होय॥
गंडकड़ा गोद में?
निकळ्यो बिच्छू अेक, परात कै हेटै दाब्यो;
सेठ, सेठाणी स्यूं कैयो, मूंदड़ो म्हानै लहाद्यो।
चोर सुणी आ बातड़ी, सोनूं है सौ टंच;
परात उघाड़ी रात में, बिच्छू मार्यो डंक॥
भोगना भुंईजग्या?
भर कांसी को थाळ, खीर ठराई छात पर;
सरद पूंन्यूं की रात, चांदो चमक्यो रात भर।
लड़ी बिल्यां खीर पर, जुद्ध मचायो घोर;
थाळ गुड़्यो झरणावियो, झरणाटै रो सोर॥
कुणकै बाज्यो थाळ, पूछै हींजड़ा?
हुयो धमीड़ो जोर को, जाणै पड़ियो बम्ब;
घुस्यो गूदड़ा मांय नै, जाणै निकळ्यो दम्ब।
होळै-होळै खोलियो, छांनै अेक किंवाड़;
अेक आंख स्यूं देखियो, ले पल्लै की आड़॥
अखबार पड़्यो हो चौक में?
रोती देखी मावड़ी, बेटी मेली बांग;
भाजी लुगायां पड़ोस की, मच्यो अणूंतो सांग।
ठंडी पड़ी, पूछण लगी, कांई होई बात;
माऊ कैवै घर धणी, दोरी मारी लात॥
रोज कुटाई को आवियो?
दस दसिया साथै मिल्या, चाल्या करण नै गोठ;
जगरै में बाट्यां सिकै, उठ्यो धुंवै को गोट।
ऊपर छातो मोह को, छिड़ी मांख भिणरा’र;
चींठी होटां-गालड़ां, माच्यो हा-हा कार॥
मूंडा रावण का सा?
जबरी आई जान, ढावै ढोल धमीड़ा;
आतिसबाजी ऊपरै, मेलै बैंड बबीड़ा।
पर सामेळै हो गयो, लेण देण में झोड़;
पगां पागड़ी मेलकर, ल्याया सगां नै मोड़॥
बीनणी भाजगी?
ओखो गेलो गांव को, जाणो कोसां दूर;
पाळो-पाळो चालणो, थक कर हो गया चूर।
गेलै में परणोटणी, परड़ पकड़ ली लार;
चरती पाडी पकड़ कर, चढ़’र छुडाई लार॥
पाडी पटक्या परड़ पै?