सुणी छ
उगबा लागगी अब
चाँद प भी
मिनखा री फसलां,
मौसम का मंसूबा
कोय न चोखा
आकास बाणी सूं पड़ी छ
मालम
क सूरज प
गरी छ बरफ,
डरफी-डरफी बाल
जा र बैठगी खाड्डा मांही
परकास क ताईं
टांक हयौ सूली प
अंधेरा को द्यौ जा रियौ छ
राजपाट,
ठोकरां खाता पाणी न
पील्यो जर को प्यालो,
घड़ी प लटको ढेम
गर पड़यौ ऊँधो,
बादलां री हड़ताल
हाल ताईं चालू ही छ,
अतनी अदला-बदली क
बाद भी
टेलीवजन वालां कै रया छ
हाल ताईं तो
कांईं भी न बदल्यौ
सब
राजी खुसी छ।