सुण सांवण री डोकरी

थारौ सांवणियौ कद बरसैलौ

धरती रौ धन रेत रुळै है

जीव-जगत कद हरसैलौ

बुसबुसिया भरती धरती रै

कुण माथै पर हाथ धरै

मौसम सगळा मांदा पड़ग्या

कुण बूझै कुण कोड करै

बिलख बात बूझै बायरियौ

कद हिवड़ौ हरसैलौ

घांणी-मांणी जूण मिनख री

आंख मींच नित भागै

धुंवौ उठै धरती माथै, कद

बळी बेल रै फळ लागै

कूंपळ कोड करै बिरखा रौ

रूंख फळां नै तरसैलौ

घटा घणी आभै घिर आई

गजब बादळी गरजै ही

पांख-पखेरू आस करी, पण

तीतर-पंखी बरजै हा

भरै खेत नै रेत चाटसी

बीज बूंद नै तरसैलौ

स्रोत
  • पोथी : माणक (पारिवारिक राजस्थानी मासिक) ,
  • सिरजक : मोहम्मद सदीक ,
  • संपादक : पदम मेहता ,
  • प्रकाशक : माणक प्रकाशन ,
  • संस्करण : अगस्त 1982
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