(1)

बीज सूं
बणै बीज, 
कुदरत री 
आ रीत। 

(2)

बीज बणनौ—

मतलब पैली
गळणौ, मरणौ 
पछै फळणौ। 

(3)

दोय पाटा 
बिचै दाणां
हमेस पीसीजै
जुगा सूं। 

(4)

धरती-सूरजी
चाँद-रोटी
च्यारूं गोळ
अबै बोल!

स्रोत
  • सिरजक : घनश्याम नाथ कच्छावा ,
  • प्रकाशक : कवि रै हाथां चुणियोड़ी
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