भोम रुखाळा सैनिक सगळा, करै देश री सेवा।

बाकी रा आगवाणी माणस, नितकी करै कलेवा।

लूट माचरी है चौतरफा,

कुण-के देश बचावै?

अगवाण्यां रा पेट भरै नी,

खुरड़-खुरड़ सै खावै!

आलमेट कर नाखै मुखिया, बाकी काढै केवा।

भोम रुखाळा सैनिक सगळा, करै देश री सेवा।

धाड़ेती धाड़ा दोड़ै बै,

नितकी बारम्बारी!

चुप्पी मार्‌यां बैठ्या पीड़ित

बुग मरगी है सारी।

दीखै नांय सांकड़ै कुण-के, पार लगावै खेवा?

भोम रुखाळा सैनिक सगळा, करै देश री सेवा।

प्राण लेय मुट्ठी में जूझै,

सैनिक सदै सिंवाड़ै!

दोखी-दुसम्यां नै मारै अर,

उण रा दांत अखाड़ै!

रिपुनै मार जीत जस पावै, मन में चाखै मेवा।

भोम रुखाळा सैनिक सगळा, करै देश री सेवा।

वीर सहीदां रै गौरव नै,

रैय भूलता आखै!

जाण साच नै तळै दबावै,

ऊपर पल्लो नाखै!

ठौड़-ठौड़ घमसाण माचग्यो, जमी होयगी बेवा।

भोम रुखाळा सैनिक सगळा, करै देश री सेवा।

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : सत्यनारायण शर्मा इन्दोरिया ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशन, पिलानी ,
  • संस्करण : अंक-19
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