गांव रै जोड़ै री

पाळ माथै

उतरैयोड़ां

खानाबिदोसां

रात री तीन बज्यां

जद खळबळ मचाई

आग जगाई

तो मैं सोच्यो—

अै करैगा अब लड़ाई

पण दिनूगै सोझलै में

मैं देख्यो—

बै तो सुत्या है

बियां ही जड़या-जापड़्या

रात बीं टेम

स्यात बै

करै हा पाळै सागे

लड़ाई।

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : निशान्त ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशन, पिलानी ,
  • संस्करण : अंक-19
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