अनुवाद : रमाकान्त शर्मा
आ दुनिया सांडियै रै सींगा माथै
नीं टिकी है
आ चालै है
थारै हाथां रै बूतै ई
अर बेलियां म्हारा भाईड़ां
वै थांनै परूसै है कूड़
जद कै थै मरौ हौ भूख
हकीकत में थांनै जरूरत है
सोरबै अर रोटी री...
हर चीज
हर मिनख बोलै है कूड़
सिवाय थारै हाथां रै।