म्हैं कयो

पण वा सुण्यो कोनी

अर सगळा सबद बावना हुग्या

अरथ आंधां अर आखर गूंगा हुग्या...

जिको साखी होवणा हा

वा सगळा रा सगळा

मसाण हुग्या

इण तरै सगळा

मन रा पाठ अधूरा रैहग्या

अै सब बातां हुई

पण वा सुण्यो कोनी।

स्रोत
  • सिरजक : रेवंत दान बारहठ ,
  • प्रकाशक : कवि रै हाथां चुणियोड़ी
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