बीज अर बज्यार का

हांसल मं होवै छै

दन-रात को आंतरो।

बीज न्हं करै कदी बी

कोख सूं दगो

बज्यार की नांई

आपणै पांव ऊंभो हो तांई

न्हं पलटै

आपणी ठाम-माटी

यां तो धरणी छै

ज्ये मांजणा जांणता सतां बी

बज्यार कर द्ये छै

आपणै पांव ऊंभो

न्हं तो दोगलाई

कुण न्हं चोखी लागै छै।

ओधै मूंडै पड़्यौ छै बज्यार

फेर अर उस्यां बी

अेक दन

जस्यो करै उस्यो

भरै छै जीव

यो छै

जिनगाणी को सांचो हांसल।

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : ओम नागर ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशन पिलानी (राजस्थान) ,
  • संस्करण : अंक-31
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