बीज अर बज्यार का
हांसल मं होवै छै
दन-रात को आंतरो।
बीज न्हं करै कदी बी
कोख सूं दगो
बज्यार की नांई
आपणै पांव ऊंभो हो तांई
न्हं पलटै
आपणी ठाम-माटी
यां तो धरणी छै
ज्ये मांजणा जांणता सतां बी
बज्यार ई कर द्ये छै
आपणै पांव ऊंभो
न्हं तो दोगलाई
कुण न्हं चोखी लागै छै।
ओधै मूंडै पड़्यौ छै बज्यार
फेर अर उस्यां बी
अेक दन
जस्यो करै उस्यो
भरै ई छै जीव
यो ई छै
जिनगाणी को सांचो हांसल।