धरणी

बीज ले’र बैठी छै

हाल बी

आपणी कोख मं

बखतसर तड़कैगो

माटी को पापड़ो।

धांस को झंडो ले’र

खडैगो बीज

बाळ पाणी अर तपन सूं

बदैगो आपू-आप

जस्यो बायो उस्यो।

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : ओम नागर ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशन पिलानी (राजस्थान) ,
  • संस्करण : अंक-31
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