जात-पांत रो दुर्योधन के, अब कृष्णा रो चीर हरैलो,
कदै नीं खंडित होवण द्यांगा, भारत अेक अखंड रहैलो।
जगां-जगां मचग्या आतंकी, टुकड़ा-टुकड़ा करणो चावै,
रगत बहावै निर्दोषां रो, हिन्दुस्तान हिलाणी चावै,
इतिहासां रा पानां बोलै, जयचंदां सूं कदै डर्या नीं,
मंदिर-मस्जिद गुरुद्वारां री, सैंग सुद्धता हरणी चावै,
दिल्ली तो है दूर देश रो, जायो-जायो जूझ पड़ैलो।
कदै नीं खंडित होवण द्यांगा, भारत अेक अखंड रहैलो।
राम-कृष्ण नानक री धरती, जुलम कदै नीं करती-सैहती
लाय लाग ज्यावै तो भी आ, महावीर री वाणी कैहती,
महाभारत सै महायुद्ध में, आ गीता रो ज्ञान सुणावै,
मारण जो माथै पर आवै, उण रा प्राण तुरत हर लेती,
मसळ दियो जावैलो माछर जियां जको आ टसळ करैलो।
कदै नीं खंडित होवण द्यांगा, भारत अेक अखंड रहैलो॥
हिंदू, मुस्लिम, सिक्ख, जैन स्सै, लड़ी लड़ाई आजादी री,
करोड़ां हुया शहीद सूरमां, बोली बातां आजादी री,
जगां-जगां रा केई-केई, लगा रैया है आज अड़ंगा,
पण संकल्प आपणो दृढ़ है, करणी रक्षा आजादी री,
रणटंकोर हुयो तो म्हारो, हिंदू मुसळमान चलैलो,
तिरंगो फहरातो प्यारो, सिक्ख, ईसाई, जैन बढै़लो।
कदै नीं खंडित होवण द्यांगा, भारत अेक अखंड रहैलो॥