मैं लिख भेजूं लीज्यै बांच

सुणबाळां नै कीज्यै सांच।

आज अजब सा गजब लालजी

खावै गिटकै मुफ्त मालजी

चोरां नै कै’ चोरी करल्यो

साहुकार नै घर संभाळ जी

झूंठी-सांची ऊंची-नीची

देवै है बै लीकां खांच।

आज राज रा चाकर देखो

बण बैठ्या है ठाकर देखो

बिन रिस्वत रै काम करै ना

फाइल वाळा आखर देखो

लूटै-खोसै कूटै-पोसै

लागण देवै कदै टांच।

आज पढ़णियां घुड़सवार जी

न्हावै निरखै तरणताळ जी

कम्प्यूटर पर करै पढ़ाई

इन्टरनेटां करै कमाल जी

मिलै-मिलावै हंसै-हंसावै

ठावी-ठौड़ां करसी जांच।

कान पड़्यो सुणै, हदरोळो

मिनख बण्यो फेरूंई बोळो

कान चिपायां फिरै सदा ही

मोबाइल है गजबी गोळो

अठै-बठै अर जठै-कठै ही

करता दीखै तीन अर पांच।

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : कल्याण सिंह राजावत ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशन पिलानी (राजस्थान) ,
  • संस्करण : अंक-27
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