सामनै है ढाळ थांरै, लारली हवा

बेगा चालौ जीमौ बेटा, चीकणा कवा।

लोभ री लगाम यांरा तोड़ देवै कौल

बाकै रै बखांण सारू खोल देवै पोल

होटां हाळी हाट करै मांनवी रौ मोल

पसीनौ परायौ बिक्कै ताकड़ी रै तोल

मांनखौ मरैला, चाली जैरीली हवा

बेगा चालौ जीमौ बेटा, चीकणा कवा।

भूंडा लागै झुग्गी-झूंपा आछौ लागै खोड़

गूंगै गेलै गंजलां रौ मेट देवै झोड़

फूंक साळै फुसकां नै झूंपड़ियां नै तोड़

थारै सांमी देखै जिकी आंख देवौ फोड़

आपै मरै तौ कींनै देवौला दवा

बेगा चालौ जीमौ बेटा, चीकणा कवा।

मांनखै नै मार मीठी रसोई बणाई है

फूटरोड़ै फूलां थांरी सेज सजाई है

मांणौ मांणौ बेटा माया सांमी पगां आई है

रोता रैसी लोग थारै बाप री कमाई है

थोथ नै पुरावां माथै धोबौ धूड़ घाल

आकड़ै री फूलियां में खेजड़ी री खाल

तावड़ै तवै रै माथै सेक म्हारा लाल

गालां माथै मोतीड़ां नै आवतां नै पाल

टाबरां रै पेट माथै टीबतौ लगा

बेगौ चाली जीमौ बेटा, चीकणा कवा।

स्रोत
  • पोथी : माणक (पारिवारिक राजस्थानी मासिक) ,
  • सिरजक : मोहम्मद सदीक ,
  • संपादक : पदम मेहता ,
  • प्रकाशक : माणक प्रकाशन ,
  • संस्करण : अगस्त 1982
जुड़्योड़ा विसै