अणजाण्यै हिवड़ै री बात

डूबता तारां ज्यूं

कुण जाणै

कद होवैला नुंवलो परभात!

गंगा रै घाट सूं

बातां री

दुकान सूं

जै चावो मिल जावै

पण कोनी मिलै आदमी!

छियां कद धोळी ही,

सूनो कद गांव रैयो

सुख तो सगळो बीत्यो

मरणै री टेम कैयो

म्हारो खून

थे चालो, मैं आयो!

सै कैवै–

सुपनो सांचो होवैला

अणहोणी बण जासी

मन थोड़ो मैलो है

थारो भरोसो है घणो उतावळो,

थोड़ा सा ढब जावो,

सोची बातां होवैला

मत मानो, कैवण तो देवो

थां में बैठ्यो सैतान

अबै गीता रो पाठ करै?

रात रो अंधारो, दिन रै

सामै आवण सूं–

लाजां मरै!

स्रोत
  • पोथी : ओळमों ,
  • सिरजक : वेद व्यास ,
  • संपादक : किशोर कल्पनाकांत ,
  • प्रकाशक : कल्पना लोक प्रकाशन रतनगढ़ (राज.) ,
  • संस्करण : सितम्बर
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