सिरजण करै’र सोकीं बगसै, जीव-तणी झिळमिळ जग जोती!
मात-धिराणी सदै पिरोवै, स्यास-तणई माळा रा मोती।
उतरादी-दिखणादी भेळै,
रिच्छावै नित दिसा अगूणी।
ऊपर-नीचै दिस आथूणी,
रैय पूरती जीवण-जूणी।
बपरावै घट उजळ-उजाळो, तेज-तणा सुरजी रा मोती।
सिरजण करै’र सोकीं बगसै, जीव-तणी झिळमिळ जग जोती।
दसूं दिसावां मात कड़ूया,
सदै सांवठा जीवण पोखै।
जीव-जीव सैंजत सूं सगळा,
बैठ्या रैय धणी ढिग गोखै।
हिरदै हेत सुलखणा सो’वै, नेह सिळावै दादी-पोती
सिरजण करै’र सोकीं बगसै, जीव-तणी झिळमिळ जग जोती।
बधै ओपमा जग में म्हारी,
मात-धिराणी किरपा मेळै।
सैंजत सदै बिठाई राखै,
रैय पूरती सैं नै भेळै।
जग जीवण री जोत उजाळै, रैय जीव रा कळमस धोती।
सिरजण करै’र सोकीं बगसै, जीव-तणी झिळमिळ जग जोती।
देस-विदेस सांवठा सगळा,
प्रेम ऊपणै पर उपकारो।
करां सेवणा सत भावां सूं,
पाळै-पोखै नित महतारी।
भाव-अभावां सूं नी जूझां, मां-धरती किरपा संगोती।
सिरजण करै’र सोकीं बगसै, जीव-तणी झिळमिळ जग जोती।