म्हारा सबद

सिगड़ी रा बळता

कोयला दांईं

भोयर होवणै री

त्यार्‌यां करै

अर मैं जकौ

इण मांय

पूळौ न्हाख’र

तपणौ चावूं।

मैं छोड़ूं

सबदां नै बाण दांईं

पण

लागण वाळी जगां

पूगता-पूगता बै

हांफीज थाकज्या

मैं हिचकूं फेरुं

उण रै धार करणै खातर।

सबद ओळ्यां मांय

पीरोइजतां-पीरोइजतां

बण जावै

गवाड़ी री बन्दरवाळ

अर साख बधावै म्हारी,

सबद

बणावै तोड़

गुलामी रो

अर देवै दीठ

ग्यान री,

सबद दिरावै मान

अर गावै गीत

गुमान रा।

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : श्याम महर्षि ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशन पिलानी (राजस्थान) ,
  • संस्करण : अंक–18
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