म्हैं जायनै

सबदकोस नै पूछियौ

कांई वो

देय सकै उधार

म्हनैं कीं सबद?

जिणसूं मांड सकूं

थारौ चितराम।

वो

आपरा सगळा खूंजा

कर दिया खाली

पण

थारी पीड़ बांचणिया आखर

उण कनै

हा कोनी

म्हैं उतरियौ

ऊंडै पयांळां

कै लाध जावै

कोई मणि

जिणरै उजास मांय

देखलूं

थारी छिब

पण

नींव रा भाटा बाजणिया

पराकरमियां रा

उतर गिया मूंडा...

मां

थूं बता

म्हैं

कठै सूं लावूं

वो साच

कै म्हारा टाबर

ओळखलै आपरै बडेरां नै?

स्रोत
  • पोथी : घर तौ एक नाम है भरोसै रौ ,
  • सिरजक : अर्जुनदेव चारण ,
  • प्रकाशक : रम्मत प्रकाशन, जोधपुर ,
  • संस्करण : प्रथम
जुड़्योड़ा विसै