अेरे!
रुंखड़ा
यूं
जणी दन
जठै जलम्यो
बणी दन सूं
वठैईस ऊबो
मायड़
जलम भोम नै
छायां देई रियो है।
थारा फूलां री
सुगन्ध सूं
चारूं आड़ी नै
मस्ती भरी रियो है।
थारा फलां सूं
जामण जाया नै
जीवण देई रियो है।
अर केऊं तो, कंई केऊं
थूं, थारा बीजा सूं
मायड़ रो
करज उतार'र
अणी संसकरती रो
भंडार भर रियो है।
अेरे! भाई रुंखड़ा
जद म्हूं
थनै अर थारा करतब नै
देखूं
तो
मनै सरम आवै क
में
मनक व्हैन
कंई कीदो?
थारा जतरोई
करतब नी कीदो
फालतुई
जलम लीदो।