राजस्थान री बातां न्यारी

तो है अेक फुलां री क्यारी

फूल है सेठिया अर बिरकाळी

राजस्थान री बातां न्यारी।

रामदेव, गुंसाई, हरीराम

जिसा हुया है देव अठै

मीरा, कबीर, नरसी

जिसा हुया है भगत अठै

अठै री लागै सबनै बोली प्यारी

राजस्थान री बातां न्यारी।

मायड़ भासा है मां म्हारी

मान चुकी है दुनियां सारी

मायड़ भासा सूं ही तो

महकै है बगिया सारी

राजस्थान री बातां न्यारी।

दुर्गादास अर महाराणा प्रताप

जिसा हुया देशभक्त अठै

पत्थर नै भी पूज्यो जावै अठै

गऊ नै मात समान मानै जठै

राजस्थान री संस्कृति है,

सै सूं अनोखी अर न्यारी

राजस्थान री बातां न्यारी।

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : पृथ्वीराज चौहान ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशन पिलानी (राजस्थान) ,
  • संस्करण : अंक-28
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