राजा जी का ऊंचा बासा।
नत कै बाजै अड़बी-तासा॥
राजकंवर कै सैल-सकारां।
पटराणी कै चौपड़-पासा॥
चलम भरै सारा दरबारी।
परजा वारै फूल-पतासा॥
राजा जी मुळकै तो म्हांनै
कांटा लागै फूलां का सा॥
ये दुख-हरता, ये सुख-करता।
मेटै जनम जनम का सांसा॥
खरी चाकरी में हाजर छै।
नो कबीर-दस कुंभणदासा॥
अरज्यां अतनी, झेलै कतनी?
लांबा घणा राज का रासा॥
अब तो करम कर्यां घर संभलै।
जदी मलै रोट्यां का गासा॥