उमड़-घूमड़ गे घटा उमड़ी, बिजळी चमकै आभै में

सुं धारां मेवड़लो बरसै, हळिया चालै खेतां में

डहरी जोड़ा भर्‌या डबाडब, डेडर बोलै डरूं-डरूं

माचीजीड़ी बेलां पसरी, चियां होग्यां फलूं-फलूं

भातो लेय’र हाळण आवै, छूग बणाय’र गावै गीत

अलबेलां रै अळगोजां में, जाग पड़्या सोयोड़ा गीत

ऊंची डाळ्यां हींडो मांड्यो, हींडै साथण मिल सारी

हरी कसूंमल पहर पोशाकां, दीपै ज्यूं केसर

तीज्यां रै मेळै में देखी, रूप जवानी मुळकै थी

अंतर में उमगी प्रीतलड़ी, दोनां रै मुंह भळकै थी

तिसी धरती तिरपत हुगी, तिरपत तन रा सगळा रूं

झिर-मिर-झिर-मिर मेवलो बरसै, सावण मास सुरंगो यूं।

स्रोत
  • पोथी : जलम भोम ,
  • सिरजक : उमाशंकर आचार्य ,
  • संपादक : मूळचंद 'प्राणेश' ,
  • प्रकाशक : राजस्थानी भाषा प्रचार प्रकाशन, बीकानेर (राज.) ,
  • संस्करण : 2-3, जून-दिसम्बर
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