कुण जाणै, कोई सिद अर क्यूं जावै है,

कद, कीकर अर किण भेळौ वौ भिळ जावैला?

सगळा ग्रह नक्षत्र आकास रै मांय

आपरी अणबीतणी जात्रा में

बिना कठैई पूग्यां, बैवता रैवै है।

अर सगळा जाणै के

नगरां में स्टेसणां माथै अर गांवां में स्टोपेज माथै

वांरी बाट उडीकणियौ भाग्य आंधौ इज है

(क्यूं के किणी नै घणौ अर किणी नै थोड़ौ मिळै है)।

सायद अेकाधा मिनट वास्तै

गाडी कठैई रुकैला अर कोई नीं जाणै

के चालै क्यूं नीं है?

पाछी चलियां पछै यात्री आपरै मुकाम रौ

अंदाजौ लगाया करै है;

पण उणीज टेसण माथै घणौ मोड़ौ व्है जाया करै है।

स्रोत
  • पोथी : अपरंच अक्टूबर-दिंसबर 2015 ,
  • सिरजक : इवान इवानवी ,
  • संपादक : पारस अरोड़ा ,
  • प्रकाशक : अपरंच प्रकासण
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