खजूर की सालरी सिराणै

कोरी माथणी सा धरया दिन

अंधियां डूंडाळा झकर

लाई ताप सूं भरया दिन

बानी वां दिनां की ही तो

भभूत ज्यूं रमा म्हैली छै

बिसरै कोई’न वा आग

रागणी जींसूं उपजी छी जोग की।

स्रोत
  • पोथी : आंथ्योई नहीं दिन हाल ,
  • सिरजक : अम्बिकादत्त ,
  • प्रकाशक : बोधि प्रकाशन ,
  • संस्करण : प्रथम संस्करण
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