पूरी दुनिया भटक'र

म्हे पाछो जाऊं गांव

म्हारी जड़ा हरी रेवै

म्हारा अेहसास जीवता रेवै

जठै देख सकूं

रात रो चांद

महसूस कर सकूं

उगता दिन रो कुरमुरो तावडो

सुण सकूं

बायरा रा गीत

इण वास्तै

म्हें फिर-फिर पाछो

जाऊं गांव।

स्रोत
  • सिरजक : दिनेश चारण ,
  • प्रकाशक : कवि रै हाथां चुणियोड़ी
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