म्हूं अेक गांव मांय हूवण वाळै

अेक औसर मांय गयो

आसै तांई

बींरै करता-धरता रो इन्टरव्यू लियो।

बुझ्यो-भाई साहब! आपरै इण आयोजन रो

मकसद कांई है?

म्हारौ मतलब– आप जीमण तांई

जिकी जनता बुलाई है

ईं रो महतव कांई है?

करता बोल्यो– जी, महत्व-धहत्व क्यां रा है

आज बूढियै रा ‘बारा’ है

बाबै रो सुरगवास हुग्यो

सो बींरै लारै गरीब गुरबां नै जिमावां हां

धरम रो काम है

बूढिये रै लारै दो सेर दाणा खिंडावां हां।

म्हूं बीं सूं बात करै हो

कै अेक चौधरी सो दीसतो मिनख

जीम’र बारै आयो

उण आप रा हाथ धोया

मूंछा उपर ताव दियो

म्हनै बींनै कनै खड़्यो देख’र मुस्करायो

अर सरक’र म्हारै नेड़ै आयो।

म्हूं मन मांय करी– ईं रो तो हांसणौ कुजरबौ है।

तो कोई हिन्दी फिल्मां रो खलनायक लागै है,

धायोड़ो धींग है,

क्यां रो गरीब गुरबो है!

बो म्हारै नेड़ै आयो

तो म्हूं बींनै बतळायो–

बूझ्यो-भाई साहब! चौधरी तो आपरै बापरै–

लारै गरीब-गुरबां नै जिमावै है

दो सेर दाणां खिंडावै है

पुन्न करै है

आप रै बाप नै तिरावै है,

पण आप तो म्हनै खांवता-पींवता

भला मिनख लखाया

आप गरीब-गुरबा मांय जीमण किंया आया?

बो बोल्यो– “देख्यौ कोनी चौधरी?

गरीब-गुरबां नै कणांई ईं रै बाप ईं–

जिमाया हा के? जिको जिमावै है?

म्हे तो म्हारो खुवायोड़ौ हो

जिको खायो है,

देख्यो कोनी पुन्न करण वाळौ

कण्ठां में लठ्ठ दे’र करवायो है,

च्यार पीसा कनै हुग्या हा

(कीं फुरळ-फुरळ करण लागग्यो हो)

बांनै बिल्लै लगवाया है

चौधर मांय पग देवण लागग्यो हो

सो जाबतो कर दिन्यौ।

खेतड़ौ हो

बो अडाणै धर दिन्यौ।

पुन्न दान आज-आज करै है

बाकी’स मांग खावण वाळौ कर दिन्यो।”

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : मोहन आलोक ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशन पिलानी (राजस्थान) ,
  • संस्करण : अंक–18
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