किणी किताब रै प्रकासण री

अणहूंती सिफारिश किंयां करीजै

मिंत म्हारा लाख लल्लू म्हैं भला

काम कोई-सो फटकारै करूं

जद तलक नीं उण नै (पांडुलिपि नै)

सावळ जोय लूं।

जद तलक नीं

उण री सावळ सोच लूं—

झाड़कै पर औढ़णो पूर म्हैं मरूं।

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : तेजसिंह जोधा ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशन पिलानी (राजस्थान) ,
  • संस्करण : अंक–18
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