प्रीत भरियै सबदां में

पावन सौ परकास

राती-लाल सिरावां थाम्यां

रवि दीपत आस

रोटी अर सांति रा

राग भरिया गान में

जरूरत है जिण री

जन रै सम्मान में

कविता है जरूरत,

कोरौ नीं है सौक

आपणी कवि गोठ,

नीं आखेटक मौज।

स्रोत
  • पोथी : रसूल अमजातोव अर विदेसी कवितावां ,
  • सिरजक : जुल्फिया ,
  • प्रकाशक : रॉयल पब्लिकेशन, जोधपुर ,
  • संस्करण : प्रथम संस्करण
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