पाणी बड़ो है अनमोल

भाया पाणी बड़ो अनमोल

ना छोड़ो पाणी रा नळ खोल

भाया पाणी बड़ो अनमोल।

बूंद-बूंद सूं घड़ो भरै है

पाणी बिना अेक पल नीं सरै है

पाणी री हर बूंद है अनमोल

भाया पाणी बड़ो अनमोल।

ना फैंको पाणी नै व्यर्थ

समझो भाईयों इणरो अर्थ

अेक दिन अेसो आवेलो

जद तोड़ो पड़ेलो पाणी रो

कोई अेक रो काम नीं है

सारा मिनखां रो है काम

फैलाओ पाणी बचाणै रो पैगाम।

पाणी बड़ो है अनमोल

भाया पाणी बड़ो अनमोल।

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : पृथ्वीराज चौहान ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशन पिलानी (राजस्थान) ,
  • संस्करण : अंक-28
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