म्हैं टाबरपणै सूं

देख रैयौ हूं

मा दिनुगै दिनुगै

पळींडै में घड़ा में

पाणी भरै

आपरै हिवड़ै सूं

घर नै हरै।

बां दिनां री बातां री

ओळू आवै

अबै

कठै है पळींडै रौ नांव?

बखत गयौ

बातां गई।

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : गौरीशंकर निमिवाळ ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशक पिलानी (राज.) ,
  • संस्करण : 26
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