म्हैं लड़ण सारूं

परौ गयौ हौ

लारै छोड़ थन्नै

अर

बसंत नै

अर चार बरस जबरा

गरजण-तरजण रा

साच

अर

करतब रै पौरूष सूं भरिया

उभा है म्हारै सांमी

समायोड़ा

एक-एक छिण मांय।

स्रोत
  • पोथी : रसूल अमजातोव अर विदेसी कवितावां ,
  • सिरजक : सुयुन बाई एरालीयेव ,
  • प्रकाशक : रॉयल पब्लिकेशन, जोधपुर ,
  • संस्करण : प्रथम संस्करण
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