अेक

खाट में पसरै बुढ़लै नै बेटो समझायो
सारो ग्यान गीत को घोंट कर पिलायो

कर्म करणो प्राणी को पहलो धर्म है
जद ही मेरो प्रार्दुभाव होयो है

जिको ई मर्म नै नहीं जाणै
बो झूठो ई जमारो खोयो है

मानू हूं ईब थारै सैं, झूठ सांच कोनी हौवै
पण थारली जइयां भी तो, कोई खाटली में कौनी सोवै

हारी बिमारी तो खाली शरीर का भोग है
हालई हार्ट अटैक कोन होयो, बस बो ही रोग है

सोचो बा अेकली के, के कर लेसी
सुधियां उठो हो, बेड टी बणा दिया करो

आपणो ही आंगणो सोवणो लागसी
दिनगे पहले लीकटी लगा लिया करो

थारै जमानै में तो बगीचा में गोठ होया करती
कदै तो बानगी थे भी बणावो

किसो होवै है जरी पल्ला को चूरमों
अेक दिन म्हानै भी चखावो

विदेशां का सारा कर्मयोगी
आप को काम आप ही सलटावै है

थारै में ग्यान की कमी है, जणाई
जूठा बरतणिया पड्या ही रह जावै है


दोय

बाप बोल्यो, तेरो ग्यान मेरै काम आगो है
मैं अर्जुन होगो हूं सारो मोह भाग्यो है

आपका सलटाणै में कोई पाप कोनी
सूत्यो पौरुष जाग्यो है
पण मैं या भी जाणु हूं कर्म क्षेत्र में लोगड़ा
शर शैय्या पर भी सोवै है।

अखन कुंवारा तो बार घालै ही है
ब्याह करेड़ा भी घणाई रोवै है॥

पण अेक पिण्ड खातर, मोह सैं पिण्ड छुटै कोनी
डोकरै को गळो भरगो।

बोल्यो आगलो इतिहास कवैगो
दुर्योधन की जीत होगी,
धरमराज मरैगो॥

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : भगवतीप्रसाद चौधरी ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशन पिलानी (राजस्थान) ,
  • संस्करण : अंक-14
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