ऊमर रै आखरी कनारा माथै
अबै जद कै सगळौ खतम व्हियौ
बाकी कीं नीं रियौ
म्है चावूं
थोड़ी तळक और बैठूं तावड़ै में
किणी रूंखड़ा रै
तपियोड़ा ठूंठ माथै
देखतौ रैवूं
आथमता सूरज री बांकी किरणां रै
पळकतै उजास में
पत्तां री गैरी छियां...
कांई फरक पड़ै
आ बात जाणता थकां
कै म्हारौ जमारौ
अेक नैनौ सौ गबोड़ो हौ
अबै तो घणी जेज व्हैगी
अबै म्हैं सुणूं हूं
उलटपांव आवती
ऊंची अर सुणीजती गूंज
आपणा ही विचारां री
आपणै करड़ै गेडियै री टैलती खटखट में
पूगौ हूं नैना सा नतीजा माथै
धूमधड़ाकै सूं कैवण री
इणमें कोई बात नीं
कै अजै तांई म्है अठै रेवतौ हौ
अर अबै आ जगा
छोड़ नै जाय रह्यौ हूं।