(1)
ओ डूंगरमाळ!
तेज तुरग री काठी माथै
अडग बैठ
चलायौ चाबक,
जद मूंडौ फेर देखियौ
तौ व्हियौ चकरीभम,
बस खाली तीन फुट
रै’ गयौ ऊपर आभौ अमाप।
ऊपरां कपाळ परबत
निधि परबत नीचां
खाली फुट तीन
अळगौ आभौ अठासूं
जो पाळा ही चालणौ
तौ माथौ नमाऔ
जो घोड़े चढ़ौ
उतर पाछा आगै जावौ।
(2)
ओ डूंगरमाळ!
ज्यूं उफणतै दरियाव
अळूझी लेहरां ऊफणै,
ज्यूं सैकडूं-हजारूं तुरग-दळ
सरपट वेग रणखेतर धावै।
(3)
ओ परबतमाळ!
थारा अे खांपा सिखर खूणा
असमानी आभै नै बींध
तेजाळ बण्या रह्या,
भुंईं लोटतौ गिगन आज
जै अधार थारौ
उणनै नीं मिळै।