आंगणै कै बीचूं बीच पड़्यो थो म्हारो डील,

बोळा'ई लोग करै दिखावो, कुछे'क साच्यांई कर रैया था बैड फील

कनै'ई घर हाळी धाड़ मार-मार कर रो रैयी थी

पण मन मन खूब राजी हो रैयी थी।

हर महिनै मांगकर पीसा लेती इब खुद पैंशन ल्यावैगी।

जीवतै जी कठै जाण को दी ना, इब मन चावै जित जावैगी।

बीं कै च्यारू ओड़ां लुगाई लुगाई थी।

बां नै सुणा के बोली—काल टिक्की का दस पत्ता ल्याई थी

जद-जद देखूंगी सांप सा लड़ैगा

कोई नै देतां बी भैम आवै, इब फींकणाई पड़ैगा।

छोटणू छोरो दोगा चींती में पड़र्‌यो थो

मूंड मुंडावता जी दुख पावै, पण समाज की परंपरा सूं डरर्‌यो थो।

बडोड़ो बम्बई सै हवाई जहाज सूं आवैगो

बो म्हारी अरथी नै ठावैगो।

भीड़ में दो जणा बतळार्‌या था

यूं समझो म्हारा गुण गार्‌या था।

अेक बोल्यो— मामूली सो कलरक थो रामदीन

पण लोट छापण की थो गुपताऊ मशीन।

बीं कै जादू नै जाणै थो सारो शहर, अर मानै थो पूरो दफ्तर

सदां सै सूं बणा कर राखी, के चपड़ासी के अफसर।

कदेई कंहीं नै नाट्यो कोनी, काम सै को बणातो

या तो कुण कै दे? कितणा अफसर नै देतो कितणा आप खातो।

दूसरै कही, जणाई दोनूं छोरां नै लायक बणा दिया

छोरी कै ब्या में कार कै साथ नगदी अर सामान सूं आगलै का घर भर दिया।

अेक कलरक की तनखा कितणीक हुवै, पण ऊपरी आमदनी मोटी है

देखणियो देखतो रै ज्या, कुण कै’दे या अेक कलरक की कोठी है।

इतणै में आगी म्हारी लाडली छोरी

बाळ बखेर्‌यां आकल-बाकल होरी।

डांवर्‌योड़ी सी भीतर बड़गी

बड़तांईं म्हारी छाती पर पड़गी।

हे राम! बीना राहु सूरज गै'गो।

बापू थे तो चल्या गया, पण थारै जंवाई को मामलो अटक्यो रैयगो।

मैं हळवांसी आंख उघाड़ी, भीड़ नै देख ओजूं मीचली

इब तो मरणूई ठीक है, यूं सोच’र जाड़ भींचली।

असल में मैं मर्‌यो कोनी थो,

चाणचक चक्कर आगो

पड़तांई म्हारो जी गोत खागो।

सुणली सारा स्त्रोता— जाणली सगळा पाठक

भोत मैंगो पड़्यो म्हारो यो नाटक।

सारो काम त्यार थो, बडोड़ो आंवता उठालियो।

शंख झालर बाज्या, मसाणा में लेजा'र, लांपो लगा दियो।

जाडां का दिन हा आथण की घड़ी

ओळां कै साथ लागगी बिरखा की झड़ी।

यूं समझो म्हारा तो भाग जागगा

आग चेतन हुयां पैली लोग भागगा।

आखरी घड़ी में राम आडो आयो

मैं खूंठां नै फींक-फांक’र बारै निकळ आयो।

पण कोट पतलून तो दूर, कच्छो थो नाड़ो

बिन पोतड़ै जलम्यूं थो, आज बी थो उघाड़ो।

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : महावीर जोशी ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशन पिलानी (राजस्थान) ,
  • संस्करण : अंक-28
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