होळै-होळै हांकौ पिवजी हिचकौ जाय सह्यौ नीं

थोड़ौ थ्यावस राखौ गोरी अब घर आगौ कोनी

मत चाल दिखावौ आसूदा बळद्यां री

भादरवै रा लीला उछळै गोरी म्हारी

कांईं चाल दिखावौ छैला म्हैं बौपारी कोनी

थोड़ौ थ्यावस राखो गोरी अब घर आगो कोनी

कड़ियां म्हारी पातळी म्हैं चणक पड़्या दुख पाऊं

आछी डरपी गोरी म्हारी छिण में वेद बुलाऊं

धन-गोळा टळ ज्यासी ढोला धोरै ढाळ ढबौ नीं

थोड़ौ थ्यावस राखौ गोरी अब घर आगौ कोनी

उतरी म्हैं नीचै देखौ पाळी चालूं ली

उतरैला मुकलावी मैंदी गेली गजब करैली

समझै बात भलां गोरी थूं कोनी टाबर नांनी

थोड़ौ थ्यावस राखौ गोरी अब घर आगै कोनी

मत देखौ थें लारै ढोला आगै खोचर खाडा

मनड़ौ मुड़-मुड़ देखै गोरी नेह रा भरिया नाडा

मत कैज्यौ पीवरियै भोळी बातां छांनी-मांनी

थोड़ौ थ्यावस राखौ गोरी अब घर आगौ कोनी

वै देखौ वै गोरी थारै सासरियै रा रूंख

म्हैं कांईं जांणूं म्हैं कद खाया सासरियै रा पूंख

इतरी तौ मांनौ बातड़ली थोड़ा पीव थमौ नीं

थोड़ौ थ्यावस राखौ गोरी अब घर आगौ कोनी

स्रोत
  • पोथी : माणक (पारिवारिक राजस्थांनी मासिक) ,
  • सिरजक : लक्ष्मणसिंघ रसवंत ,
  • संपादक : तेजसिंह जोधा ,
  • प्रकाशक : माणक प्रकाश ,
  • संस्करण : जुलाई 1981
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