मोसर रो अरथ म्हैं फगत

इत्तो ईज जाणूं कै

बा’रा दिनां तांई

लोग पेट पर

हाथ फेर-फेर’र खुल्लो खावै

अर आगली

होळी-दीवाळी माथै

घर रा टाबर

लोगां रै

घरां जीमै।

स्रोत
  • पोथी : कवि रै हाथां चुणियोड़ी
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