कलम लिखै किरपाण कोर दे
सांच में आंच है झगड़ै-क्यूं
राजरा-रमणा अकड़ै क्यूं
पेड़ी-पेड़ी चढ़्यौ कूकड़ौ
मेड़ी चढ़कर बोल्यौ यूं
कुण है जनगण मतकर टणमण
कान खोलकर सुणले तूं
म्हैं तो साची बात बखाणूं
दुनिया रोसी यूं की यूं
राजा अम्मर ज्यूं का त्यूं।
पेड़ी भूल पालणौ भूल्यौ
भूल गयौ सब रमतां नै
भासा भूल भाव नै भूल्यौ
आण-काण सब समता नै
म्याऊं देखी कांपण लाग्यौ
डरमत भिड़जा भागै क्यूं
कसले कम्मर सागै हूं।
भारत भाग्य विधाता थां रै
घर में घास उगा दीनी
धन-धरती रा रुखवाळां
आथूणी लाय लगा दीनी
हर पल मौत उडीकै तन्नै
मौन साधले मत कर चूं
सूनै घर की बाखळ हूं
म्हैं तो आकळ-बाकळ हूं।
अंहकार नै जीमण हाळा
जलमै रोज, मरै कोनी
न्याय-ताकड़ी हाथ में राखै
बोलै बोल सुणै कोनी
सत री न्याव डूबती लागी
लोग चूणै जद राजा हूं
म्हैं तो साझा-बाजा हूं।
घड़ियौ फोड़ घिरगनौ थांरै
हाथां में ले घूमर घाल
भूखा-भूत बाकळा मांगै
रूड़ी लागी आंरी चाल
कलम लिखै किरपाण कोर दे
सांच में आंच है झगड़ै क्यूं
राजरा रमणा अकड़ै क्यूं।
थांरै खातर बीच बजारां
म्हारा बचिया बिकवाया
बलिदानी हूं मोज करौ थे
मुरगा-मुरगी तळवाया
म्हैं हाजर हूं हुकम करो थे
म्हैं तो थांरौ चाकर हूं
लूखौ-पाकौ भाखर हूं
कुकड़ू-कूं-भई-कूकड़ू कूं
डरमत भिड़जा भागै क्यूं।