(अेक फोटू माथै आंकियोड़ौ लेख)

कितरी तेजाळ ताकड़ी

लागै देखौ अै लुगायां

पांचफुटी बन्दूकां जिणा रै

खांधै ओप पावै।

सगळी लड़त सीखवा सारु

भेळी हुई सिखाऊ भौम माथै,

जिण में पेलूड़ी किरणां सूं आपणी

जगजगाळ करै सूरज

आज सगळी बेटियां चीन री

होंसाळ ऊंची आस सूं

रेसम-साटण सूं नीं, प्रीत तौ

आं नै आपणी लड़वास सूं।

स्रोत
  • पोथी : रसूल अमजातोव अर विदेसी कवितावां ,
  • सिरजक : माओत्से तुङ्ग ,
  • प्रकाशक : रॉयल पब्लिकेशन, जोधपुर ,
  • संस्करण : प्रथम संस्करण
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