बिना मानता राजस्थानी, नो-नो आंसू रो री है।

आगै आकर धजा थामले, बैं माणस नै टोरी है॥

जणूं-जणूं मनसा राखै,

मायड़ भासा मान मिलै।

जैं सूची में हिन्दी-उर्दू

बैं सूची में थान मिलै।

चटशाळा में पाठ पढ़ै अर

चालै कोट कचेड़ी में

ब्या शादी का नूंता छपज्या,

बंतळ आंगण मैड़ी में॥

पण डोली को सजणूं हेठो, बिन बाबै की छोरी है।

आगै कर धजा थामले, बैं माणस नै टोरी है।

मेवाती अर मेवाड़ी की

बात बणावै पाड़ोसी

मरुबाणी अर ढूंढाड़ी की

टांग खींचरी हाड़ौती

आओ सै नै मिला जुलाकर

सुघड़ सलूणूं हार घड़ां

अेकरूपता ल्यावण खातर,

सकल नगीना सबद जड़ां।

लिखां पढ़ा अर बांच सुणावां बता बात के दोरी है।

आगै आकर धजा थामले, बैं माणस नै टोरी है॥

कवि-लिखारा लिखै मोकळो,

सुरसरत को भण्डार भरै।

नामी पोथी बीजी भासा,

बण को बै अनुवाद करै॥

खेल तमासां भासा झलकै,

मुळकै घणी तींवारा पर

हरख पीड़ का मंडै मांडणां

भासा कै अखबारां पर॥

बिन छापां तो अैयां जाणूं, मायड़ भासा कोरी है

आगै बढ़ कर धजा थामले बैं, माणस नै टोरी है।

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : महावीर जोशी ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशन पिलानी (राजस्थान) ,
  • संस्करण : अंक-29
जुड़्योड़ा विसै