मां तो मां है

सात सुख हुवै संसार में

मां ममता री होड़ नहीं

किणी जूण में हुवा

चौरासी लाख जूण में

मां तो मां है।

च्यारूं जुगां में

च्यारूं लोक में

मां री पूजा व्हैती आई है

आज भी व्है री है

व्हैती रैवैला

इण सांच नै

कोई नकार नीं सकैला।

मां रा सात नांव हैं—

धरती मां

जननी मां

वेदमाता-गायत्री

गुरू माता

गौ माता

अर विमाता।

और तो और

सूरज री किरणां रा रंगसात

संगीत रा सुर सात

भव सात

बायां सात

अर सुख सात

इतरा होतां थकां भी

मां तो मां है।

पूज्य है।

जगद्जननी मां दुर्गा रा

नव रूप तो जग चावा है

वां रै नव नांव रा नौरात्रा

सर्वसुख प्रदाता है

ज्यूं नव मास गर्भ में

राखण वाळी जननी मां

मां तो मां है।

सगळा दुख-कस्ट

मां खुद भुगत’र

औलाद नै पाळै पोसै

बडा करै

परणावै

वां रै टाबरां नै पाळै

इतरा रोभा देखतां थकां

मां आं में सुख सुख देखै

कदैई सळ नीं भरै लिलाड़

मां तो मां है।

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : स्वामी खुशालनाथ’धीर’ ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशन पिलानी (राजस्थान) ,
  • संस्करण : अंक-33
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