ओ म्हारा दादोसा!
थानै बेरो है मन्नै
थारी धोळी दाड़ी स्यूं चिबखाण है।
मन्नै ओ ठा' है कै–
थानै थारी अंगरखी पर गुमान है।
पण, थानै आ जाणकारी होसी कै
थे टूटेड़ै ग्यातां री निसरणी हो,
अर म्हे उगतै सूरज री क्यारियां।
पण थे चालता ही थारली फटकार म्हानै सुणा ज्याओ हो।
अर म्हे चुप्पी स्यूं थानै आदरां।
औ म्हारा बापसा।
थानै पतो कोनी पर म्हे जाणा हां–
कै थारै माथै में घणकरा सिद्धांत सूख'र धोळा होग्या है।
अर म्हारली काची कूंपळां जहर-सी खारी लागै है
थे लड़ो तो म्हारै के है?
म्हे नीची घूंड घाल लेस्यां,
पण साच तो दिन ऊंचो आंवतां ही ऊभी हो ज्यासी।
ओ म्हारी मां..!
थानै तो म्हूं समझा लेस्यूं गारगौर कर नै साची बता देस्यूं।
कीं आं बीच तूं स्याणी है।
क्यूंकै तूं तेरली घणी कोनी चलावै
तूं मेरी मां है।
मनै बेरो है, तूं जद लड़ै है
अेक छोटी-सी कोथळी में प्यार भी राखै है।
पण देखलै तेरै सामै आगली पीढ़ी आवण वाळी है।
बा आंवतां ही कह देसी–
'घूंघटो उघाड़ नै काच में देख तूं अब बोदी होगी है।'
पण म्हैं तो तेरै कान में कैऊं हूं–
नुवीं पीढ़ी रै सूणापै नै आदरी,
फेर मौज करी।
बैठी खाई, पोतां-पोती नै खिलाई।