अंतर री भभरोळां

जद-जद नसौ पगां चाल्यौ

फगत पूगौ थारै गोखड़ै।

नितहमेस

थारी दूखती रगां रा खोजी

वांरा पासवान्या

उडती खंख माथै गुलाब जळ रा न्हाक छांटा

लुळ-लुळ बताया मारग

आं कांई कांई जुगतां नीं करी

कठै कठै टवळियां नीं खाई

पण पूगा पाधरा

थारै रोवता टाबर रा कतल्या सूं पग पूंछ

अजेज मांडता मारग

मर्‌योड़ी मेड़ी मांय।

थारै धूजतै कालजै

पसर्‌या—

गादीमोड़ां

मांडी मैफल—

अणूंती फाटी।

पण थारा साईना आड़तियां तौ

गोडा लग लुळ लुळ कर्‌या

जवारड़ा

अर वां लिलाड में सळ घाल

मुळकता मुळकता झेल्या

सात सिलांम।

तठापरांत रोज री भांत

मरजीदांन नांणौ लेय झिलाई

झिलाई फड़फड़ाती कूकड़ियां

कसाई रै हाथां

जांमण नै नचाई नागी

मैफलां।

थैं हिवड़ै रा रगत सूं

होठ रंग

नीं जांणै क्यूं

पीयर जावण रा जित्ता कोड में

रचाई मैंदी रावणी

मन मन

लजाळू बींनणी रा चित्रांम लियां

सोवनी सोरठ

थैं झांझर री ठोड़-बांध्या घूघर बाजणां।

सासरै सिधावण रा जित्ता

हरख में

थूं रणकां-जणकां ऊभी व्ही

बांकड़ला नैणां में

सांचरती सूग नै दाट

भर भर सळायां

सार्‌यौ सुरमौ।

मन मसोस-माडांणी

मूंडै मुळकती

धूजतै हाथां उठाई

पानदांन सूं गिलोरियां

मैली आंख्यां-मीट गडाय

नीठ, धूजतै काळजै

झिलाया प्याला लोभियां नै।

खोजगिया मायत उस्तादां

नवायौ माथौ

अटकळी तबलां पेटियां

स्यात् उणी दिन सूं

नाचणी सरू व्ही

बापां रै साम्ही बेटियां।

घोड़ियां खिसकाय खिसकाय

मिलाय बेसुरा बाजां

गळगळै गला सूं छिड़ाई तानां

थें पाछली ओवरी सूं खैंच

मां रै डीलां चालती चीसां

बायरिया नै बरज्यौ/संभाळी बाजू री लूमां

अर करी मनवारां

उण दिन

अण दीठा फगत फीटा

केसरिया बालम री।

ऊंधी आंकड़ियां गाय घूमर री

किणी किणी रै घरै देवण री

बिरथा अरदास लियां

अलापां-अलापां चढ़गी नाचती

मारग बणती हवेलियां।

थारौ आडौ-अंवळौ बोलतौ

जिनावरियौ

बणग्यौ खास सोदागरी-मानखौ

अर

थूं झाला झाला देवण री

आंकड़ियां झिलगी

उण दिन सूं

थारी कुरळाती कुरजड़ियां सनेसौ चबाय

बे-पतै रा बालम लग पूगती

बेरंग व्हैगी।

करांझ-करांझ

सारंगी री लैरां साथै

गांजरा गरू रौ ध्यान छोड

थूं समरपित व्हैगी, गतबायरा दुसासणां

थनै उण दिन व्हियौ

ईसकौ द्रोपदां सूं।

दारू री भभकती

भूंडी भासणां

नाकां सूं माथै तांई चढ़गो

पण हो बा रोक-थूं

नितहमेस सूवती गी खाटल्यां

सूखा हांचल झिलाय टाबरां नै।

थारा निवाछ नै खाय-पीय

अै जड़ बिहूण

नितहमेस दिन दूणां फळग्या

अबै तौ मन में चैत बैरण

आं निसासां सूं तौ

थारा हीज काळजा बळग्या।

मन परबारी बाल्हा देवती

ओसांण देख—भर डाचौ

के आंरै गळै पूरी री पूरी

बत्तीसी गडजा।

अबै तौ अैड़ी कर जुगत

अर इतिहासां चढ़ जा।

आवसियोड़ी आंतां समेट

घूमर लैवती

अणछक गिरोळा रै मिस

जाय पड़

बाजता बाजां माथै

के साजिन्दां री अटकळां

अंवळी फिरजा

बाजता बाजां रा बळिता व्हैजा।

गाभा खोलती

नसौ बण-चढ़ आंरी नसां-नसां

अर मांय जाय पसर

के अै सूखी फळियाँ ज्यूं

तिड़क-तिड़क बिखर जा।

मांद सूं ताती मां रौ

निवाछ ओढ़

धंस

आं री रातीचुट आंख्या में

के आंने रातिन्दौ व्हैजा।

अधर सूं अधारा में

बिछाव थारौ डील

अर खैंच इण री भभकती मरदानगी

इण आंटीला रौ अंट काढ़

इणनै अस-बायरौ कर दे।

पाछी हांचळ झिलावती

रोवतै रगत रै मूंडै

पूग—नीतबायरां री

पूग सूं अळगी

नैह री टपरी बणाय

मनमेळु रै मन में समाय जा

अर दै फटकारौ

के दारू रै पगां ऊभा

आं मदछकिया मिनखां नै

मिरगी आयजा।

स्रोत
  • पोथी : अपरंच (अंक-4) ,
  • सिरजक : चंद्रप्रकास देवल ,
  • संपादक : पारस अरोड़ा ,
  • प्रकाशक : जुगत प्रकासण, मेहता भवन, कबूतरां रौ चौक, जोधपुर
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