मंहगाई भाई आ मंहगाई
खाणनै रोटी नीं है
नीं है ओढ़ण नै रजाई
नीचै ही सोणो पड़ै
चारपाई तो दूर, नीं है चटाई
मंहगाई भाई आ मंहगाई।
पापी पेट है जकै रै खातर
हुवै भाईयां मांय लड़ाई
आयो ईसो घोर कळजुग
मरणै री आफत आई
खायगी आ मंहगाई
मंहगाई आ मंहगाई।
सेव, आम, अमरूद देख’र
कोठी, बंगला, हवेली देख’र
घणो ही जी ललचाई
रीपियै रो है खरचो
आठ आना री कमाई
मारै आ मंहगाई
मंहगाई आ मंहगाई।