(1)

अै अणगिण झरणा हरियाळा, परबत अै लीला
सगळा बिरथा, काम भला आवै किण रै?
बणाय दिया निरजोर दुस्टी इण नैनकड़ै जीवड़ै
ह्वा थ्वो नै जो चावा हा वैदु
गांव सैंकड़ां घिर अलूझाणा, खरपतवारां
मिनख जीवड़ा नीं ठा कितरा व्हिया विसरजत
ऊजाड़ व्हिया घरबार हजारां री गिणती में
करै प्रैतड़ा परळाटा अठै सोक री अगन समरपत
अडग रह्या, पण धरती पर नतकी दूरी
अस्सी हजार ली तांई मापण करता।

गिगन रौ ठा ठसकौ दूर कर असमान
नभ गंगा रा अणगिण छगदां निरखां करता।

जे पूछतौ गवाळौ कीं समंचार
है ताउन-देव रा
तौ पड़ूत्तर मिळतौ
व्हियौ बहतौ नदियां जळ ज्यूं
दुख दोरम सगळौ।

(2)

वसंत वायरौ सरपत-वन में
सरक रह्यौ सरसर,
याओ अर शुन जेड़ा साठ कोट जन देव भौम पर
लाल दरसणी लहरां में पलटै आज
म्हारी इंछा रौ बळ,
अर म्हारी इंछा सूं पुळ
बण्या है हरयाळा डूंगर।

चमकण लागी है अणगिण गौतियां 
गिगन चूमणिया पांचूं परबतां 
बळबांकी बाड़ियां करै है चारूमेर
तिखेणी री धरती रौ पलटाव।
कठै गया थां? आज सुआळ करा हां 
ताउन देव सूं
आभ उजाळी बळती कागद री नावां सूं
मेणबती सूं।

ह्वा थ्वो - चीन रौ एक नामी वेद

स्रोत
  • पोथी : रसूल अमजातोव अर विदेसी कवितावां ,
  • सिरजक : माओत्से तुङ्ग ,
  • प्रकाशक : रॉयल पब्लिकेशन, जोधपुर ,
  • संस्करण : प्रथम संस्करण
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