बादळ चमकै बीजड़ली, मनड़ो घणो उदास।

आजो सावण तीजड़ली, भंवर सुणो अरदास॥

रिमझिम लागी झड़कली, हिवड़ो छोडै साथ।

रूखां लपटी बेलड़ली, मनड़ो घणो उदास॥

नद नाळा ऊफाण पै, मनड़ो भरै कुलांच।

धण कैवै धनड़ो तजो, (क्यूं) सूता लांबी खांच॥

सरवरिया सगळा भर्‌या, कुरजां नहिं पणघट्ट।

किण विध दूं संदेसड़ो, खाली रैसी घट्ट॥

आंसूड़ा स्याही बण्या, हिचकी हुई कागद्द।

आंटा अंवळा औळबा, किण विध भेजूं कंत॥

चमकै चूड़ौ लाख रो, इतिहासां परसिद्ध।

कळझळ घाली रैण-दिन, पिव बिन मांडी जिद्द॥

चढ़-चढ़ ऊंचै डागळै, नित-नित जोऊं बाट।

परदेसां कागद दियो, उठै हियै सूं लाट॥

स्रोत
  • पोथी : हिवड़ै रो उजास ,
  • सिरजक : दूदसिंह काठात ,
  • संपादक : श्रीलाल नथमल जोशी ,
  • प्रकाशक : शिक्षा विभाग राजस्थान के लिए उषा पब्लिशिंग हाउस, जोधपुर
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