पुरधार है पच्छम पवनियौ
केंकार करै गगन रै घेर में वनहंसला
परभात री वेळ
हिंवाळ है चांद री किरण।
गूंजे है तुरंग-टाप
मद्धम तुरी बाजै घनघोर गूंज।
बिरथा है अबै ओ केवणौ
आज आ अभेद नाळ
लोखंडी भींत जैड़ी;
द्रढ़ डगां सूं पार करतां
सिखर इणरौ इणी टैम।
अठै डूंगरमाळ पसरियौड़ी
असमानी दरिया जेड़ी सांवठी
अर आथूणा सूरज रौ
लोही जेड़ौ रातौ डील।