फगत म्हैं इज अेक इस्यौ मिनख हूं
जिकौ सगळौ-कीं लारै छोड’र
कठैई आघौ जाय रयौ हूं
आघौ इण बेंच सूं
म्हारा अंतस रा पड़दां सूं
साधारण व्यवस्था सूं
म्हारी रोजीनां री जिंदगाणी सूं
टूटोड़ी नेम प्लेट सूं
फकत म्हैं
दूजौ कोई नीं
अेकलौ म्हैं इज सगळां सूं आघौ
जाय रयौ हूं।
म्हारी खुद री मौत ई
म्हारै सूं न्यारी हुय रयी है
अठा तांई कै
म्हारा बिछावणा ई ‘जैरामजी री’ कैय रैया है।
म्हारौ ‘म्हैं’ ई अेकलौ अर आजाद
घूमण सारू रवानै हुयगौ है
अर प्रेतां सूं मुगती पायली है।
अेक-अेक करनै
म्हैं सगळी चीजां सूं ‘विड्रा’ कर सकूं हूं
क्यूं कै अै सगळी चीजां
लारै छूट जावैला।
जद म्हैं आ साबित करणी चावूंला
के “जिण वगत कतल हुय रयो हो
म्हैं उठै नीं हो।”
म्हारा जूता, जूता रा छेकला, कादौ-कीच
अठा तांई के म्हारी ऊजळी
इस्त्री कर्योड़ी कमीज रा चमकता
बटणां तांई लागोड़ौ कादौ
इण बात नै पुख्ता करैला
के कतल म्हैं इज कियौ हूं।